बातचित




  • बज्जिकाके विकासमे सभीओरसे सहयोग होनाइ जरुरी हए :- शेख चाँद अलि



    संस्थाके गतिविधि सकारात्मक रूपसे अगाडि बढरहल हइ । बाहरसे लौकेबाला औपचारिक गतिविधिमे कुछ कमी आएल हइ माकिर अब कुछ दिनमे सबकुछ ठीक ढंगसे संचालन होए लगतइ । �औपचारिक गतिविधिमे कमीके कारण ?

    � आन्तरिक छलफल नहोए सकलाके चलते । कुछ समयसे बै�� क भी नहोरहल हए । अनौपचारिक ढंगसे ही छलफल होके काम अगाडि बढरहल हइ ।

    � बै�� क के बोलतइ ?बज्जिका भाषाके विकासके लेल ग�� न भेल पहिल संस्था बज्जिका विकास प्रतिष्�� ानके संस्थापक अध्यक्ष शेख चाँद अलि नेपालीय बज्जिकामे व्यंग्य कविके रूपमे अप्पन अलगे पहचान बनएले छथिन् । बज्जिका भाषाके साहित्यके विकासके लेल साहित्य गोष्�� ी आ छलफलके आयोजना भी करेबाला शेख चाँद अलि कविताके क्षेत्रमे चञ्चल चाँदके नाओसे परिचित छथिन् । पिता शेख ओहाव आ माता फहिमा खातुनके गर्भसे एकइस वसन्त पहिले जयनगरमे जलम लेले चाँद अलि नेपाली साहित्यमे स्नातक कएले छथिन् । अपने प्रारम्भिक शिक्षा लेले अपने गाँओ इस्कुलमे शिक्षकके रूपमे अप्पन जन्मधर्ती रौतहटके जयनगरमे कार्यरत अलिसे बज्जिका भाषा आ साहित्यपर केन्द्रित रहके कएलगेल बातचितके खास अंश ः
    � बज्जिका विकास परिषद्के गतिविधि केहन चलरहल हइ ?
    � संस्थाके गतिविधि सकारात्मक रूपसे अगाडि बढरहल हइ । बाहरसे लौकेबाला औपचारिक गतिविधिमे कुछ कमी आएल हइ माकिर अब कुछ दिनमे� � � � �  सबकुछ �� ीक ढंगसे संचालन होए लगतइ ।
    �औपचारिक गतिविधिमे कमीके कारण ?
    � � आन्तरिक छलफल नहोए सकलाके चलते । कुछ समयसे बै�� क भी नहोरहल हए । अनौपचारिक ढंगसे ही छलफल होके काम अगाडि बढरहल हइ ।
    � बै�� क के बोलतइ ?
    �  � संस्थाके संयोजकके नातासे बै�� क हमही बोलबइ । अब कुछ दिनमे औपचारिक बै�� क बोलाके कार्यक्रम अगाडि बढारहल छी ।
    � अभी अप्पन साहित्य रचनाके अवस्था केहन हइ ?
    �  �वर्तमान अवस्थामे अपना साहित्य सिर्जनामे कुछ सुस्तापन आएल हए । अभी पारिवारिक�सामाजिक वातावरणके कारण सिर्जन क्षेत्र कुछ सुस्ताएल हए । पर्हु घरमे आग लागके जरगेलाके बाद सिर्जन कर्ममे कुछ कमी आएल हए ।
    �संस्थाके आगामी योजना कथि हइ ?
    �संस्थाके कार्यक्रके बारेमे सभी साथीके एक जगह बै�� क बोलाके छलफल करनाइ जरुरी हइ । बइ�� क आ आन्तरिक छलफलके बाद संस्थाके आगामी योजना आ कार्यक्रमके विस्तार कएल जतइ ।
    � �अब अपनेके योजना कथि हइ ?
    � अब साहित्य सिर्जनामे लागेके योजना बनारहल छी । सिर्जनामे कविता त पहिलेसे लिखही रहल छी, अब निबन्ध आ कथाके रचनाके ओर भी कलम अगाडि बढारहल छी ।
    � अभी पढाइ�लिखाइ केहन चलरहल हइ ?
    �मुख्य रूपसे जीवनवृत्तिके लेल काम लागेबाला अध्ययन होरहल हइ । पेसामे काम लागेबालाके साथे साहित्यमे जानकारीके हिसाबसे काम लागेबाला पुस्तकके अध्ययन भी कररहल छी ।
    � अभी बज्जिका भाषाके विकासके बात चारुओर चलरहल हइ, कुछ हदतक सकारात्मक कदम भी अगाडि बढल हइ । एइपर प्रतिक्रिया ?
    �बज्जिका भाषाके नाओ बहुतलोग नसुनले रहे तखन्ता हमनी सऽ संस्था ग�� न कइली । संस्थाके मार्फत पत्रिका निकालली । ओसे लोगमे धीरेधीरे जागरण आएल । बज्जिकाके प्रति लोगके रुचि बढल । बज्जिकाके विकासके लेल लोगमे हिस्का भी बढल । प्रचारप्रसारके लेल लोग लागल । इ सऽ देखके खुसी लागरहल हए ।
    � स्थानीय एफ.एम. रेडियोमे बज्जिकाके प्रयोगपर कुछ कहम ?
    �अभीके अवस्थामे बज्जिका भाषा रौतहटके एफ.एम. रेडियोके प्रमुख माध्यम भाषा हए । हमनी पत्रिका निकालली, पत्रिका सीमित लोगमे आ सीमित जगहमे ही रहजाले माकिर रेडियोके स्रोता पत्रिकाके तुलनामे बेसी रहलइ । ए कारणसे एफ.एम. रेडियो बज्जिकाके जनस्तरमे पुगाबेमे महत्वपूर्ण योगदान देरहल हए । बज्जिकाके एतना तीव्र गतिसे विकासमे रेडियो एगो मुख्य कारक हइ ।
    � अन्तमे आउरो कुछो कहेके चाहम् ?
    �बज्जिकाके विकासमे कौनो तरहसे लागल सभीके हमरा व्यक्तिगत आ संस्थाके तरफसे धन्यवाद । केतनो व्यस्त रहलापर भी अपना मातृभाषाके विकासके लेल तइको समय निकालके भाषाके विकासमे अपना तरफसे होएबाला योगदान देबेके परलइ, इहे हमपना तरफसे सभीके आग्रह करेके चाहइछी । जेतना संभव हो सके ओतना बेसी लेखरचना कऽके भाषाके विकास करेके परलइ कहके हम आग्रह करम । हमरा अप्पन विचार पत्रिकाके मार्फत राखेके मौका मिललापर गोरखापत्र नयाँ नेपाल यूनिटके भी धन्यवाद ।


बज्जिका वाणी

2072-08-08
2070-01-22 .pdf

बिकाश चौतारी

BC 2073-05-06
BC 2073-05-06
BC 2073-04-31
2072-08-28

जिल्ला प्रहरी का. - ५२००९९
जिल्ला प्रहरी का. - ५२०१७७
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