विचार/विश्लेषण




  • मुस्लिम समुदायमे तिलक प्रथा :- आलम



    मुस्लिम समाजमे भी अभी बहुत किसिमके भेदभाव कायम रहल हए । हिन्दु समुदायमे रहल जइसन बहुत किसिमके भेदभाव मुस्लिम समाजमे भी रहल हए ।
    मुस्लिम समाजमे भी अभी बहुत किसिमके भेदभाव कायम रहल हए । हिन्दु समुदायमे रहल जइसन बहुत किसिमके भेदभाव मुस्लिम समाजमे भी रहल हए । तिलक प्रथा मुस्लिम समुदायमे भी रहल हए । वास्तवमे इ प्रथा कौनो भी समाजके लेल उपयुक्त नहए । कौनो भी समाजके लेल इ प्रथा खराब ही मानल जाएत । मुस्लिम समुदायमे भी तिलक प्रथा अत्यधिक रहलाके चलते बहुत लोग बेटी जल्माबे ही नचाहले । बेटीके निकाहमे तिलक देबेके होएलासे बहुत लोग तिलकके बोझसे बचेके लेल बेटी जल्माबे नचाहले । एकर विपरीत देखल गेलापर बेटाके निकाहमे तिलक आबेबाला होएलासे बेटाप्रति कौनो चिन्ता केनहुसे नकएल जाले ।
    तिलक प्रथाके चलते बेटा आ बेटीमे आउरो किसिमके भेदभाव भी कायम हए । हमनीके समाजमे बेटाके निम्मन निम्मन खाना खिआबेके, निमन कपडा पेन्हेला देबेके आ बेटीके निमन खाना नदेबेके साथे बेटीके हरदम पिटाइ परइत रहेके जइसन भेदभाव भी कभीकभी केनहुकेनहु देखल जाइअ । कुछ अवस्थामे अइसन भी देखल गेल हए कि बेसी तिलकके लोभमे अधिक बेटाके जलम देल गेल हए । बेसी बेटा जल्मनाइके भी हमनीके समाजमे अच्छा मानल जाइअ । बेटीके तिलक देबेके परलासे बेटीके जल्माबे भी नचाहइअ ।
    बेटा आ बेटीमे भेदभाव जलमके बेरसे ही सुरु होइअ । अबहिओ बहुत समाजमे अइसन भी हए कि बेटा जलम भेल त पाटी देलक । छठियारके समयमे लमहर भोज कएलक । बर्थ डे मनाबेके चलन भी कुछ बढ्ते गेल हए माकिर बेटीके जलम आ छठियारमे शायदे कोइ अइसन करइत होइ । ए सबके प्रभाव कुछ हदतक मुस्लिम समुदायमे भी परल हए । बेटीके जलम होएलापर चिन्ता करइत भी देखल गेलापर अचरच नहोइ । बेटीके जलमपर मुस्लिम समुदायमे ओतना खुसी मनाबेके लेल समाज अभी तैयार नहोए सकल  हए । माकिर एक दिन अइसन होइ कहके विश्वास लेल जासकइअ ।
    समाजमे अइसन भेदभावके हटानाइ जरुरी हइ । अइसन भेदभाव हटाबेके लेल आदमीमे चेतना आ बुद्धिके होनाइ जरुरी हइ । शिक्षाके ज्ञान होनाइ ओतने जरुरी हइ । चेतनाके कमी हमनीके समुदायमे भी रहल हइ । वास्तवमे देखल जाए त तिलक नलेबेके चाहिँ । सबके बेटा बेटी एक समान होइअ । अपना बेटीके निमनसे तिलक नदेबे सकलापर ससुरारमे ओकर सास ससुर पिटेके जइसन खराब काम करइत सुनल जाइअ कभी कभी । बच्चेसे  ही भेदभाव सहते आएल लड्कीलोग  सादी�निकाहके बाद अपना घरमे गेलापर भी निमनसे सुखसे साँस नलेबे पबइअ । कुछ परिवारमे मामला इहाँतक बिगड जाइअ कि तिलकके चलते तलाक भी होजाइअ । इ सबमे सुधार होनाइ जरुरी हइ । शिक्षा आ चेतनाके विकासे अइसन प्रथामे कमी आबेके हमरा विश्वास हए ।    बगही, रौतहट


बज्जिका वाणी

2072-08-08
2070-01-22 .pdf

बिकाश चौतारी

BC 2073-05-06
BC 2073-05-06
BC 2073-04-31
2072-08-28

जिल्ला प्रहरी का. - ५२००९९
जिल्ला प्रहरी का. - ५२०१७७
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