विचार/विश्लेषण




  • बज्जिका विकासमे महिलाके सहभागिता



    सञ्जय साह मित्र/
    बज्जिका भाषाके विकासमे महिलाके सहभागिता बढरहल देखलजाइअ । बहुत महत्वपूर्ण आ अर्थपूर्ण सहभागितासे बज्जिका भाषा आ साहित्यके विकास रथ आगे बढरहल हए ।
    बज्जिका भाषाके विकासमे महिलाके सहभागिता बढरहल देखलजाइअ । बहुत महत्वपूर्ण आ अर्थपूर्ण सहभागितासे बज्जिका भाषा आ साहित्यके विकास रथ आगे बढरहल हए । बज्जिका भाषाके विकासके लेल होरहल सुरुके प्रयाससे ही महिलाके सहभागिता रहल हए । जेहिना विकासके पग आगे बढरहल हए ओहिना महिलाके सहभागिता आ क्रियात्मकतामे भी वृद्धि भेल हए । एही कारणसे बज्जिका भाषाके विकाससे सम्बन्धित सभी क्षेत्रमे महिला अग्रणी मोर्चापर डटल मिलइअ । भाषाके विकासके लेल महिलाके सहभागिता बहुत अर्थपूर्ण होएलासे कामके मूल्यांकन करनाइ भी जरुरी रहलई । एई लेखमे नेपालीय बज्जिकाके विकासमे महिला सहभागितापर संक्षेपमे चर्चा कएलगेल हए ।
    मकवानपुरके हेठौडामे रौतहटेली सरोकार समाजके गठन पचासके दशकमे होएल रहे । ओई संस्थामे एकजने महिला रहस वन्दना सिन्हा । बज्जिकाके विकासमे औपचारिक रुपसे हुनकेसे महिलाके सहभागिता देखाइ परइअ । कविता आ लेखके माध्यमसे आ संस्थामे रहके काम करेके दृष्टिसे हुनकर सहभागिता बहुत अर्थ रखइअ । वर्तमानमे सम्भवतः ओतना सक्रिय भूमिका देखाइ नदेइत हए मगर हुनकर कामके इतिहासमे मूल्यांकन होनाइ भी जरुरी हए । जब रौतहटरश्मि साहित्यिक पत्रिकाके प्रकाशन भेल तब कुछ नारी हस्ताक्षरके रचना प्रकाशित भेल पत्रिकाके प्रमुख व्यवस्थापक शीतल गिरीके कहनाम हए । ओतिघरिके लेखकके नाओ इयाद नरहल मगर कुछ लेखिकाके रचना बज्जिकामे छपाएल हुनकर कहनाम हए । रौतहटरश्मिके रास्ताके आउरो चौडा करइत समनपुष्प त्रैमासिक कुछ नारी हस्ताक्षरके रचना प्रकाशित कएले हए । दुनु पत्रिकाके बनाबल रास्तापर चलके कुछ नारी प्रतिभा बज्जिका लोककथाके नेपाली भाषामे आ बज्जिका कहावतके बज्जिका भाषामे संकलन करेमे बहुत लमहर योगदान देले हए ।
    नेपालीय बज्जिकाके विकासमे बज्जिकार्पण साहित्यिक पत्रिकाके प्रकाशनसे महिलाके साहित्यसिर्जना आ सक्रियतामे सकारात्मक प्रभाव परल बुझाइअ ।� बज्जिकार्पणके प्रवेशांकसे ही नारी सिर्जना प्रकाशन होरहल हए । अभीतक बज्जिकार्पणमे रजनी कुमारी चौधरी, पुष्पा यादव, समतोलिया कुमारी मुखिया, सीमा जयसवाल, रमिला साह, संगीता गिरी, सविता सहनी, चनाज्योति सहनी, सरिता साह, अमिरखा कुमारी साह, रिया साह, मालादेवी जयसवाल, विजयालक्ष्मी साह, अर्चना कुमारी पटेल, सुनिता सहनी, मीनाकुमारी साह, सुनिता कुमारी पटेल, इन्दिरा भारती, रेखा महतो, रिंकु साह, संगीता यादव, अंजु यादव, रेणु गुप्ता, सबिता कुमारी साह, अनिता देवी ठाकुर, मेनका साह, मुस्तुरी बेगम, शान्ति दास, पुनम सहनी, आरती मिश्रा, अनिसुन खातुन, प्रिया गुप्ता, विनिता यादव, अर्चना कुमारी दास, मेनिका जयसवाललगायतके नारी सर्जकके साहित्यिक आ भाषिक रचना छपाएल देखलजाइअ । विभिन्न विधाके साहित्यिक आ भाषिक रचनामे महिला सब अप्पन अलगे पहिचान बनाबेके सफल भी देखाइ परइअ । समतोलिया कुमारी मुखियाके सुन्नर देश बने चाहइछी आ बज्जिका वर्णमाला मिलाके दुगो कृति भी प्रकाशित हए । बज्जिका भाषाके पहिल कृतिकार मुखिया गोरखापत्र दैनिकके नयाँ नेपालअन्तर्गत बज्जिका भाषाके पृष्ठ सहसंयोजकके भूमिका भी निर्वाह कएले छत । अइसही रेणु गुप्ताके इतिहास आ लाल झा नाओके अनुवाद कृति भी बज्जिकामे प्रकाशित हए । कविता, लघुकथा आ मुक्तकके साथे लेखमे महिला सहभागिताके प्रमुख क्षेत्र रहल हए । हालहीमे रौतहटसे प्रकाशित पूर्णिमा साहित्यिक त्रैमासिक आ अलगे भाषिक संरचनाके साथ प्रकाशित भगजोगनी मासिक पत्रिकामे भी महिला सहभागिता रहल हए ।
    अल्पना कुमारीके नाओपर जिला प्रशासन कार्यालय रौतहटमे हमनीके बात मासिक पत्रिका दर्ता हए । पत्रिकाके नियमित प्रकाशन होए नसकल मगर नियमितताके लेल सार्थक प्रयास कएलगेल हए । समतोलिया कुमारी मुखिया, मेनका साह, संगीता सहनी, मेनका साह, रेणु गुप्ताके संयुक्त सहयोग समितिके निर्माण कएलगेल हए जेसे हमनीके बातके निकालेमे आसान होई । दुनु कृतिकार महिला साहित्यसिर्जनाके क्षेत्रमे बहुत सक्रिय छथिन् । कृति प्रकाशन करे नसकलापर भी संगीता सहनी, मेनका साह, विजयालक्ष्मी साह साहित्यिके क्षेत्रमे उलेखनीय नाओ हए ।
    रौतहट एफएमके सुरुआत होएलापर बज्जिका भाषाके विकासमे महिलाके सहभागिता आउरो मुखरित भेल हए । वास्तवमे बज्जिकाके विकासमे एफएमके महत्वपूर्ण भूमिका रहल आ बज्जिका भाषामे प्रसारण होएबाला स्थानीय समाचारमे महिलाके प्रवेशसे भी बज्जिकापर सकारात्मक प्रभाव परल हए । रौतहट एफएमसे विद्यालक्ष्मी, अल्पना कुमारी श्रीवास्तव, सुनिता श्रीवास्तवजइसन लोगके स्थानीय खबरके माध्यमसे बहुत दिनतक सुनले हए । अइसही राजदेवी एफएमसे प्रमिला मिश्र, वीणा राउतके बोली जनजनमे पहुँचल हए । आज भी रौतहट एफएमके सुनिता श्रीवास्तव आ राजदेवी एफएमसे प्रमिला मिश्र आवाजके दुनियामे बहुत लमहर महत्व रखले हए ।
    बज्जिका भाषासे सम्बन्धित विभिन्न संस्थामे भी महिलाके सहभागिता देखल जासकइअ । बज्जिका भाषा विकास परिषद नेपालके सदस्यमे रेणु गुप्ता छथिन् । अइसही नेपाल बज्जिका भाषा शिक्षक प्रतिष्ठानमे मेनका साह सचिव छथिन् । प्रतिष्ठानके मातहत स्रोतकेन्द्रस्तपर गठन भेल आठगो स्रोतकेन्द्रस्तरीय समितिमे भी महिला सहभागिता रहल हए । अइसही करिब चालीसजने शिक्षिका बज्जिका भाषाके पढाइके सम्बन्धी तालिम लेले हए । बज्जिका भाषामे विभिन्न विद्यालयमे औपचारिक निर्णयके बाद नेपाली आ अंग्रेजीके छोरके बाँकी विषयके पठनपाठन होरहल हए जेमे महिला शिक्षकके सहभागिता अत्यन्त सराहनीय रहल हए । एईसे बज्जिकाके जर मजगुत होएके साथे बज्जिकाके विस्तार भी होरहल हए ।
    संक्षेपमे बज्जिका भाषा आ साहित्यके विकासमे महिलाके सहभागिता हर क्षेत्रमे बढइत जारहल हए । पत्रकारिता, साहित्यसिर्जना आ संगठन सभी क्षेत्रमे महिला अगाडि बढरहल हए । पत्रकारिताके छापा माध्यम आ विद्युतीय माध्यम दुनुमे महिलाके पहुँच होनाइ सुखद हए । एतने न बल्कि बज्जिका भाषाके विकासके लेल आवाज उठाबेके काममे भी दर्जनो महिला सक्रिय रहल हए । समग्रमे बज्जिका विकासयात्राके बहुते यात्रुके नाम छुटल होसकइअ मगर योगदानके साँचो अर्थमे सभी लोग स्वीकार कएले� छत । यथार्थ त इहो हए कि बज्जिकाके विकासमे बज्जिकांचलके सभी महिलाके सम्मानित स्थान� हए । कुछ लोग प्रतीकात्मक रुपसे नेतृत्व करइत आगा बढेके आ बढाबेके काम कररहल छत । वर्तमान अवस्थाके देखके महिलाके चलते बज्जिका भाषा आ साहित्यके भविष्य बहुत सुरक्षित आ उज्ज्वल देखाइ पररहल कहल जासकइअ ।


बज्जिका वाणी

2072-08-08
2070-01-22 .pdf

बिकाश चौतारी

BC 2073-05-06
BC 2073-05-06
BC 2073-04-31
2072-08-28

जिल्ला प्रहरी का. - ५२००९९
जिल्ला प्रहरी का. - ५२०१७७
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