त्रेतायुगसे ही विजया दशमी मनाबल जारहल हए हिन्दु संस्कृतिमे
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त्रेतायुगसे ही विजया दशमी मनाबल जारहल हए हिन्दु संस्कृतिमे

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त्रेतायुगसे ही विजया दशमी मनाबल जारहल हए हिन्दु संस्कृतिमे


रौतहट, आसिन १४ । हिन्दु संस्कृतिमे त्रेता युगसे ही विजया दशमी मनाबेके परम्परा रहल हए । अइसन मान्यता हए कि त्रेता युगमे भगवान श्री राम लंकाके राजा रावणके आसिन महिनाके इँजोरिया पखके दशमी तिथिके दिन ही बध कएले रहलन । रावणके उपर रामके विजयके आसुरी प्रवृत्तिउपर देव प्रवृत्तिके विजयके प्रतीकके रुपमे आजतक देव प्रवृत्तिके लोग विजया दशमीके भव्यतापूर्वक
 मनारहल हए । अइसही सत्य युगमे ही देवी भगवती शुम्भ निशुम्भ नामक दैत्यके बध कके दैवी शक्तिके प्रतिष्ठापित इहे दिनपर कएले विश्वास हए । विजया दशमीके दिन देवी भगवती आ भगवान राम दुनुके पौराणिक कथाके संयोग रहलासे हिन्दु संस्कृतिमे अत्यन्त श्रद्धा आ भक्तिपूर्वक दसैँ मानल जाइअ । दैवी शक्तिके मानेबाला पक्ष हिन्दु समुदाय आ भगवान रामके कथापर विश्वास करेबाला पक्षके बाहुल्यताके आधारपर विश्वभरमे विजय दशमी अपने किसिमसे मानेके परम्परा रहल हए ।



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