भाषा/संस्कृति




  • सन्तानके लेल :- जितिया पबनी



    रेणु गुप्ता I
    नेपालके सांस्कृतिक क्षेत्रमे भी धनिक मानेजाएके अपने कारण हई । सांस्कृतिक विविधता एक्कर लमहर सम्पत्ति हई । हर जात समुदाय आ सम्प्रदायके अपन अनेक किसिमके पबनी तेहार रहल हए । मधेसके साझा संस्कृतिमे भी अइसन बहुत पबनीतेहार हए जे वास्तवमे ओतना प्रसारप्रसार नहोएलापर भी बहुत महत्त्वपूर्ण मानलजाइअ ।

    �मधेसी समुदायके महिलाद्वारा मूलरुपसे मानलजाएबाला अइसने मौलिक पबनीमेसे एगो हए�जितिया ।

    मधेसके अधिकांश पबनी तिथिके हिसाबसे मानलजाइअ । सूर्यमास अर्थात् मितिके हिसाबसे मानेजाएबाला पबनीके संख्या बहुत कम हए । थितिके हिसाबसे मानेजाएबाला अनेक पबनीमेसे जितिया भी हए । आसिन महिनाके अन्हरियामे जितिया मानलजाइअ । बिआह भेल बेटी�बहिन आ मतारी जितिया पबनी करले । पहिलबेर जितिया उठाबेबाला बेटी�बहिनके नइहरमे बोलाबल जाइअ । नइहरमे ई पबनी उठावले लोग पहिलबेर । सन्तानके सुख प्राप्ति आ लम्बा आयुके लेल मनाबेजाएबाला अई पबनीके पहिलबेर करेबालाके कुछ जादा भिराह बुझाइअ ।

    तीन दिनतक चलेबाला जितिया पबनीके मूल दिन अठमी होइअ । एई पबनीके पहिल दिन स्नान कऽके खाना खाइअ । नहा खाएके दिनके कहीँकहीँ लाई भी कहलजाले । एह दिन पवित्र भोजन करेके चलन हए । दुसरका दिन भुखे उपवास बसेके परले । एह दिनके उपास भी कहलजाइअ । तिसरका दिन पूजा कऽके पबनीके समापन कएलजाइअ । पबनीके समापन नभेलातक पानीसमेत नखाएके होअलई । अन्तिम दिनके पारन कहलजालई ।

    पहिल दिन व्रतालु महिला नदी चाहे पोखरीमे नहाए जाले । आजकाल त कलपर चाहे धारापर भी नहाएके चलन चलल हए । ओह दिन नदि चाहे पोखरीके कान्हीपर जाके पबनइतिनलोग घिउँराके पातापर तोरी चाहे सरसोके खरीके घुलाके�सौनके आधासे नहाएके आ बाँकी आधासे घिउँराके पातापर पूजा करेके चलन हए । पूजा कएलापर फेर नहाएके परले । मूल पबनीके पहिलका रात दर खाएके चलन भी केनहुकेनहु मिलइअ । तीजसे पहिले दर खाके पबनी सहेके जइसन ही कुछ महिला दर खाके पबनी सहइत देखलगेल हए । मूल पबनीके दिन सबेरे स्नान कऽके जीत वाहन भगवानके पूजा कएलजाइअ । पाँच किसिमके अनसे पोराके गेन बनाके विभिन्न रङके कपडासे बनल घोडा आकारके पुतरीके पूजा होइअ । व्रतालु महिलालोग गाँओघरमे एक जगह जामा होके जितवाहन भगवानके कथा सुनइअ । कथामे चिल्होर आ सियारके मुख्य प्रधानता रहले । रातभर लोग जगले रहेके सोचइअ । नियमसे तीजके लेखा ही रातभर जगले रहेके चाहिँ मगर बहुत व्रतालु नजागले । तिसरका दिन स्नान कऽके पूर्ण शुद्ध होएलापर पूजा कएलजाले । पूजाके पारन होएलाके बाद पबनएतिन महिलाके पाँचगो सउँस चाउर आ केराओके बिना चिबएले घोंटेके परले । अइसन प्रसादी दोसरा केकरो नदेबेके होअले । जदि कौनो महिलाके एई प्रसादीमेसे देआइत हए त सौतिन आबेके मान्यता रहल हए । कहेके मतलब ई हए कि जदि दोसर महिलाके अइसन प्रसादी कौनो व्रतालु महिला अपना हाथसे देइत हए त व्रतालु महिलाके जीवनमे केनहुसे सौतिनके प्रवेशके सम्भावना बढ़जाले ।

    महिलासबके मात्रे मनाबेवाला एई पबनीके कुछ लोग नारी स्वतन्त्रतासे भी जोड़के देखले । कुछ महिलाके कहनाम हए कि ई पबनीके सुरुआत बेटा आ बेटीमे विभेदके जरसे भेल हए । बेटाप्रधान पबनी हए । महिलाके करेके मगर बेटा चाहे घरबालाके स्वास्थ्य आ दीर्घायुके कामनासहित । वर्तमान समयमे बेटा आ बेटीके बीचमे विभेद कम होरहलासे सन्तानके आयु आ दुर्घटनासे रक्षाके पबनीके रुपमे मानेके संस्कार विकास होरहल हए । मधेसी समुदायके लेल अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पबनीके रुपमे रहल जितियाके बचाबेके लेल सरकारके ओरसे भी कुछ विशेष करनाइ जरुरी हए ।






  • श्रद्धापूर्वक मनाबल जारहल हए जितिया पबनी - 2016-09-23

    सम्पूर्ण मधेसी समुदायके महिला जितिया पबनी श्रद्धापूर्वक मानरहल हए । काल्हु नहाके खएले महिला सब सन्तानके सुख तथा लम्बा आयुके कामनासहित कठित पबनी कररहल हए । घिउँराके पत्तापर तेल आ खरी चढाके काल्हु लोकदेवता जितबाहनके आह्वान कएले सन्तानवती व्रतालु महिला एहबेर भोरमे दहीचिउरा चढएले हए ।


    बज्जिका कलाके संरक्षण आ विकासके लेल गौरमे सम्पन्न भेल हए वृहत छलफल - 2016-06-05

    बज्जिका कलाके संरक्षण, संवद्र्धन आ विकास होनाइ जरुरी रहल महसुस कएलगेल हए । बज्जिका साहित्यकार, पत्रकार, बुद्धिजीवी, प्रचारक तथा शुभचिन्तक लोग एगो कार्यक्रमके बीच बज्जिकाभाषी क्षेत्रमे रहल हिन्दु तथा मुस्लिमके संस्कृति, साँस्कृतिक सम्पदा आ जनचेतनाके भी कलाचित्रकलाके


    बज्जिकांचलमे परम्परागत किसिमसे मनाबलगेल हए सतुवान पबनी - 2016-04-14

    बज्जिकांचल समाजमे नयाँ वर्ष सतुवान कके मनाबेके परम्परा रहल हए । ग्रामीण समाजके साथे सहरिया जीवनमे भी बुजुर्ग लोग नयाँ वर्षके सुरुआत सतुवाके साथे कएले छत । बैसाख १ गते सतुवानके रुपमे मनाबेके परम्परा बज्जिकांचल समाजमे चलते आरहल हए ।


    बज्जिाका भाषीसव विश्व मातृ भाषा दिवस विभिन्न कार्यक्रम कके मनएलक - 2016-02-21

    विभिन्न कार्यक्रम करके बज्जिका भाषामे विश्व मातृ भाषा दिवस मनावल गेल हए । ग्रामिण शिक्षा विकास नेपालके आयोजनामे आजु रौतहट जिल्लाके सदरमुकाम गौरमे विभीन्न कार्यक्रमसव करके बज्जिका भाषा विकास समारोह २०७२ भव्यताके


    विश्व मातृभाषा दिवसमे बज्जिका भाषामे विद्यालयस्तरीय वक्तृत्वकला भेल हए सम्पन्न - 2016-02-19

    एगो कार्यक्रम करके मातृ भाषा दिवस मनावल गेल हए । विश्व मातृभाषा दिवसके अवसरपर जिलाके सदरमुकाम गौरमे विद्यालयस्तरीय वक्तृत्वकला प्रतियोगिता सम्पन्न भेल हए । ग्रामीण शिक्षा विकास नेपाल रौतहटके आयोजना तथा जिला विकास समिति


    बज्जिका साहित्यकारके बज्जिकांचलसे निरन्तर होरहल हए पलायन - 2016-01-07

    बज्जिका भाषा आ साहित्यके क्षेत्रमे सक्रिय लोगके बज्जिकांचल क्षेत्रसे निरन्तर पलायन होरहल हए । बज्जिका शुभचिन्तक, साहित्यकार तथा भाषासेवी एवं भाषाप्रेमीके दोसरा जिला पलायनके बेमारीसे बज्जिका भाषा आ साहित्य पीडित बनते गेल हए । समनपुष्प साहित्यिक त्रैमासिकके सम्पादन कके बज्जिका भाषाके साहित्य आ लोकसाहित्यके विशेष योगदान देले रमेशमोहन अधिकारी रौतहटसे मकवानपुर पलायन होएल रहलन । साथे सूर्योदय साहित्यिक पत्रिकाके सम्पादकके रुपमे भी अधिकारी बज्जिकाके प्रोत्साहनके लेल भरमग्दुर प्रयास कएले रहलन । साहित्यकार शीतल गिरी भी आधा दशक पहिले रौतहटसे काठमान्डुमे चलगेल छत । रौतहटरश्मि साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिकामे बज्जिकाके विशेष महत्व आ स्थान देबेबाला


    बज्जिका साहित्य गोष्ठी गरुडामे भेल हए सम्पन्न - 2015-12-26

    बज्जिका साहित्य संगम रौतहटद्वारा गरुडामे साहित्य गोष्ठी सम्पन्न भेल हए । गरुडा नगरपालिका वार्ड नम्बर २ मित्रनगरमे बज्जिका भाषा विकास परिषदके केन्द्रीय उपाध्यक्ष लालबाबु साहके प्रमुख आतिथ्यमे शुक्रबार सम्पन्न कार्यक्रममे करिब


    बज्जिका भाषा आ साहित्यके उन्नायक समर्थन कएले छत गृह जिला प्रस्थान - 2015-12-17

    बज्जिका भाषा आ साहित्यके क्षेत्रमे अमूल्य योगदान देबेबाला शिक्षक रमेशहरि शर्मा ढकाल अपना जिला लौटल छत । तीस वर्ष तीन महिना रौतहटके विभिन्न सरकारी विद्यालयमे शिक्षण सेवासे जुटल ढकाल रमेश समर्थन नाओसे साहित्य सिर्जना


    मुनामदन बज्जिकामे, भाषा विकासके लेल दर्जनों लोगद्वारा जनाबलगेल प्रतिबद्धता - 2015-11-15

    नेपाल बज्जिका भाषा शिक्षक प्रतिष्ठान आ बज्जिका साहित्य संगम रौतहटके आयोजनामे बज्जिका भाषाके विकासके लेल आयोजित एगो विशेष कार्यक्रममे सहभागीलोग बज्जिका भाषाके विकासके लेल अपनातरफसे प्रतिबद्धता व्यक्त कएले छत ।


    बज्जिका भाषा विकास हेतु साहित्य गोष्ठी तथा शभकामना कार्यक्रम - 2015-10-19

    बज्जिका साहित्य गोष्ठी तथा शभकामना आदानप्रदान कार्यक्रम सम्पन्न भेल हए । रौतहटके गरुडा नगरपालिका अन्तर्गत मलाहीमे साहित्यकार सञ्जय मित्रके अध्यक्षतामे बज्जिका साहित्य गोष्ठी तथा शुभकामना आदानप्रदान कार्यक्रम सम्पन्न भेल हए ।


    बज्जिका साहित्य संगम रौतहट भेल गठन - 2015-10-19

    बज्जिका भाषाके साहित्यके विकास तथा विस्तारके लेल रौतहटमे एगो संस्थाके गठन कएलगेल हए । बज्जिका साहित्यकार संजय मित्रके अध्यक्षतामे गरुडा नगरपालिकास्थित मलाहीमे बज्जिका भाषाके साहित्यकारलोगके भेलासे बज्जिका साहित्य संगम रौतहटके गठन कएलगेल हए ।


    सन्तानके लेल :- जितिया पबनी - 2015-10-05

    नेपालके सांस्कृतिक क्षेत्रमे भी धनिक मानेजाएके अपने कारण हई । सांस्कृतिक विविधता एक्कर लमहर सम्पत्ति हई । हर जात समुदाय आ सम्प्रदायके अपन अनेक किसिमके पबनी तेहार रहल हए । मधेसके साझा संस्कृतिमे भी अइसन बहुत पबनीतेहार हए जे वास्तवमे ओतना प्रसारप्रसार नहोएलापर भी बहुत महत्त्वपूर्ण मानलजाइअ ।


    धीरेधीरे लोप होइत जरजटिन - 2015-09-29

    भादो इँजोरियामे बेटीबहिनके द्वारा खेले जाएबाला गीति लोक नाटक जरजटिन अब धीरेधीरे लोप होएल जारहल हए । भादो महिनाके इँजोरियामे अविवाहित चाहे विवाहित बेटीबहिनके साथे महिलाद्वारा गीत गबइत दू समूहमे जाटा आ जटिनके पक्षके होखे खेले जाएबाला जरजटिन मधेसके संस्कृतिके एगो महत्त्वपूर्ण अंग रहल मानलजाइअ ।


    जरजटिन ः एगो महत्वपूर्ण संस्कृति - 2015-09-29




    बज्जिकावाणी बेवसाइटके संचालनमे अएलापर बज्जिकासेवीद्वारा शुभकामना व्यक्त - 2015-09-27

    बज्जिका भाषाके पहिल बेबसाइट संचालनमे अएलापर बज्जिकासेवी आ बज्जिका भाषाके शुभचिन्तकलोगद्वारा शुभकामना व्यक्त कएलगेल हए । बज्जिका भाषामे रामायणके लेखक एवं बज्जिकाके भीष्म पितामह डा. अवधेश्वर अरुण खुसी व्यक्त करइत बज्जिका भाषा संचारके नयां युगमे प्रवेश कएले बतएले छत ।


    बज्जिका गीता भेल प्रकाशित - 2015-09-27

    नेपालीय बज्जिका भाषाके एगो महत्वाकांक्षी ग्रन्थ बज्जिका गीता प्रकाशित भेल हए । रौतहट चन्द्रपुरके हरिकृष्ण काफ्लेद्वारा रचित बज्जिका गीता चौरासी पृष्ठके रहल हए । करिब चार बरिस पहिले रचना भेल कृतिके ग्रामीण शिक्षा विकास नेपाल जेठरहिया प्रकाशन कएले हए ।


    बज्जिकामे पिएचडि करेबालाके संख्या बढल - 2015-09-27

    भारत आ नेपालके विभिन्न जिलामे लोकभाषाके रुपमे हजारो बरिससे अस्तित्वमे रहल बज्जिका भाषामे पिएचडि करेबालाके संख्या दिनपर दिन बढते जारहल हए । सन् १९७०के आसपासमे बिहारके गोपालगंज जिलाके गोपेश्वर कलेज हथुआके प्रोफेसर डा. श्रीरंग शाही बज्जिका भाषापर पहिलबेर पिएचडि


    बज्जिकामे पिएचडि करेबालाके संख्या बढल - 2015-09-27

    भारत आ नेपालके विभिन्न जिलामे लोकभाषाके रुपमे हजारो बरिससे अस्तित्वमे रहल बज्जिका भाषामे पिएचडि करेबालाके संख्या दिनपर दिन बढते जारहल हए । सन् १९७०के आसपासमे बिहारके गोपालगंज जिलाके गोपेश्वर कलेज हथुआके प्रोफेसर डा. श्रीरंग शाही बज्जिका भाषापर पहिलबेर पिएचडि


    त्याग और समर्पणके त्योहार ईद—उल—अजहा मानवल जारहल - 2015-09-25

    ईद—उल—अजहा या ईदे—अजहा मुस्लिम भाइयोके एगो महत्वपूर्ण त्योहार हए । ईद तीन तरहके होईअ । ईद—अजहाके अलावा दुगो और ईद हए— ईदुलफित्र या रमजान ईद और दोसर ईदके मिलादुन्नबी कहइअ । पर ईदुल फित्र होए, ईद अजहा या ईद मिलाद, तीनु ईद भाइचारा, त्याग, समर्पण और इंसानियतके पैगाम देईआ ।


    समाप्त होएके अवस्थामे, धार्मिक एवम् पर्यटकीय पहिचान - 2015-08-14

    जिल्लाके सदरमुकाम गौर स्थित बरहवा ताल क्षेत्र, सिवनगर शिव मन्दीर, राजदेवमे रहल राजदेवीमन्दीर, महादेपटी शिव मन्दीर, बागमति नदी किनारमे रहल

बज्जिका वाणी

2072-08-08
2070-01-22 .pdf

बिकाश चौतारी

BC 2073-05-06
BC 2073-05-06
BC 2073-04-31
2072-08-28

जिल्ला प्रहरी का. - ५२००९९
जिल्ला प्रहरी का. - ५२०१७७
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